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लोगो के जीने का
कुछ रखते है चाहत बस
कुछ अपनों से बहुत दूर है
कुछ हालातो से हैं तंग बड़े
कुछ शर्म-ऐ -पर्दा के पीछे है
कुछ मोड़ते है लहरों के रुख को
कुछ सहते है वार सीने पे
सब जद्दो-जेहद मैं है “हरमन”
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"कुछ कहानियाँ मुकम्मल नहीं होतीं मगर उम्र भर याद रहती हैं..."
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