Posts

Showing posts from December, 2011

ਸਜਰੇ ਪਿਆਰ ਦੀ....

सोच में फर्क....

शुकर गुजार हूँ....

ਬਿਨ ਪਾਣੀ ਦੇ ਜਿਵੇ ਫੁੱਲਾਂ ਨੇ ....

मुश्किलों का दौर था....

कुछ तो कह कर....

निभाना नहीं चाहती थी....

दीए भी बुझा देता हूँ...

शम्मा ने कहा.....

ਐਂਵੇ ਮਾੜਾ ਕਹਿੰਦੇ ਸ਼ਰਾਬ ਨੂੰ...

ਜਿੰਦ ਨਿਮਾਣੀ....

ਤੇਰੇ ਆਉਣ ਦੀ ਖਬਰ...

तेरे नजदीक आना.....

तेरी दोस्ती का सिला....

दे सकते थे जवाब .....

मर ही जाऊ ...

ਹਾੜਾ ਈ ਓਹ੍ਹ ਮੇਰੇ ਡਾਡੇਈਆ ਰੱਬਾ.....

धुआं सा उठ रह था.....

बहुत थक गया हूँ....

इश्क बोला बंदे से........

खुदा ने माँगा हिसाब था...........

ना कह पाया उनसे दिल की बात..............

जो बनना चाहा था......

कोई उनसे उनकी बेरुखी का .....

हमें देखकर लोग ..........

मासूमियत ही तो है हथियार उनका ......

इश्क कहते है बर्बाद कर देता है........

तेरी सादगी पे मर मिटे है हम तो.......

ਦਰਦ ਬਥੇਰੇ ਨੇ ਇਸ ਦੁਨਿਯਾ ਵਿਚ .......

ਜੇ ਅੱਜ ਮੈਂ ਕਿਸੇ ਦੇ

ਸਮਝ ਕੇ ਕੋਮਲ ਫੁੱਲਾ ਨੂੰ