Untitled

कर्मो का किया भुगत रहा हूँ
दुखों का बोझ उठा रहा हूँ
दर्दो वाली रख कंधे गठ्ठड़ी
नंगे पैर चलता जा रहा हूँ
अपना कोई भी साथ नही है
अकेला ही भार उठा रहा हूँ
जैसा किया वैसा भुगतना पड़ता
इसी सच को माथे लगा रहा हूँ

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