गम-ए-दौर

गम-ए-दौर का मंज़र भयानक ही सही दुनिया मैं लोग बसते और भी है
मत बना बेबसी को कमजोरी अपनी जरा गौर से देख रस्ते और भी है
कलम :- हरमन बाजवा ( मुस्तापुरिया )

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