मैं चिराग हाथों में लेकर

मैं चिराग हाथों में लेकर उजाले हर जगह ढूँढता रहा
ना एहसास था जरा भी अँधेरे साथ साथ चल रहे थे
मैं खड़ा था जो लिए कश्ती को एक ही जगह पर
पर किनारे भी तो अपनी जगह बार बार बदल रहे थे
कलम -: हरमन बाजवा ( मुस्तापुरिया )

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