चाँद सितारे ...

चाँद सितारे भी थे और खूब नज़ारे भी थे
साथ देने को अकेले मेरा बेबस किनारे भी थे
टूटे जो कईओ के दिल बेचारे भी थे
जो बची उनकी यादो के अब तो सहारे ही थे
कलम :- हरमन बाजवा ( मुस्तापुरिया )
 

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