लोगो के जीने का
ढंग है बड़ा अजीब
कुछ रखते है चाहत बस
कुछ पाते है हर चीज
कुछ अपनों से बहुत दूर है
कुछ गैरों के है अज़ीज़
कुछ हालातो से हैं तंग बड़े
कुछ को खुशिया है सब नसीब
कुछ शर्म-ऐ -पर्दा के पीछे है
कुछ को भूली है तहज़ीब
कुछ मोड़ते है लहरों के रुख को
कुछ डूबने के है बहुत करीब
कुछ सहते है वार सीने पे
कुछ धोखे के है मुरीद
सब जद्दो-जेहद मैं है "हरमन"
तू भी निकाल "बाजवा" तरकीब
कलम :- हरमन बाजवा ( मुस्तापुरिया )
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