तेरा मेरा रिश्ता
कुछ अजीब है
फांसले है बहुत पर
दिल के तू करीब है
तेरी हर अदा का
ये शक्श मुरीद है
तुझे पाना ही आजकल
मेरी तहरीज है
ज़माने की परवाह नहीं
मुझे जरा भी
तू ही दिल को मेरे
सबसे अजीज है
मालामाल है "हरमन"
तेरी मोहब्बत से
सिवा तेरे तो "बाजवा"
बहुत ही गरीब है
कलम :- हरमन बाजवा ( मुस्तापुरिया )
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