तेरी चाहत का ...

तेरी चाहत का असर अभी होना बाकी है मर्ज-ऐ-इश्क के दर्द में रोना बाकी है
सूखी पलकों को अभी और भिगोना बाकी है जहाँ से ना लौट पाए,राहो मैं खोना बाकी है
कलम :- हरमन बाजवा ( मुस्तापुरिया )

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