Shayrana Andaaz
आज वक़्त का जोर है तेरे साथ कोई और है
दिल की सुनसान गलियों में कैसा हरमन मचा ये शोर है
जिधर भी देखू नजरे उठा कर सिवा तेरे ना चेहरा कोई और है
कलम :- हरमन बाजवा ( मुस्तापुरिया )</h5>
Comments
Post a Comment