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HINDI
February 22, 2012
जन्नत भी उनके लिए दोसक है...
जन्नत भी उनके लिए दोसक है
लबो पे मोहब्बत और दिल में जिनके नफरत है
झूठ बोल कर जाहिर करते के सच है
ऐसे गिरे हुओ का क्या मक्का और क्या हज है
कलम :- हरमन बाजवा ( मुस्तापुरिया )
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