राहे तकना तारे गिनना ...

राहे तकना तारे गिनना सादिक काम हमारा है

उनके लिए तो होने वाला रोजाना का एक मुजाहिरा है

हर शय गवाह है इस बात की तेरा नाम ही हरमन ने पुकारा है

पर मेरी डूबती हुई कश्ती को नहीं मिलने वाला कोई किनारा है

फिर भी बच गया हूँ जाने कैसे मौला तेरा ही तो सहारा है

वर्ना उस ज़ालिम ने तो मुझे तडपा तडपा के मारा है

कलम :- हरमन बाजवा ( मुस्तापुरिया )</h6>

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