एक शाम तेरी ज़िन्दगी से उधार चाहता हूँ
गर मिल सके तमाम उम्र का प्यार चाहता हूँ
मेरी ज़िन्दगी में आये बन के बहार चाहता हूँ
हर पल मिले जो दिल को करार चाहता हूँ
आये चेहरे पे ख़ुशी जिसके वो दीदार चाहता हूँ
हो बिन बादल मोहब्बत की बौछार चाहता हूँ
हर सांस पर हो जिसका इख्तिआर चाहता हूँ
जो करे हरमन पर भी जां निसार चाहता हूँ
कलम :- हरमन बजवा ( मुस्तापुरिया )
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