जलते हुए को ...

जलते हुए को देख कर भी ना उनसे रहा गया
के पास आये मेरे और हाथ सेक कर चल दिए
उम्मीद तो थी शायद के मुझे बचा लेंगे
पर उन्हें कोई फर्क ना था के कौन जल रहा था
कलम :- हरमन बाजवा ( मुस्तापुरिया )

Comments