दिल में जो....

दिल में जो छुपा दर्द था वो आज बहार निकल आया

कोशिश तो की थी बहुत मैंने पर खुद को ना रोक पाया

कदम बढ़ गए अपने आप पर ना मंजिल पर पहुच पाया

सोचा था दर्द बाँट लूँगा पर किसी ने ना मुझे बुलाया

बड़ी मुश्किल थी वो घडी यह रास्ता था जब अपनाया

खुशियों से मुह मोड़ के हरमन बरबादियों में निकल आया

कलम :- हरमन बाजवा ( मुस्तापुरिया )</h6>

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