राहें आसान नहीं....

राहें आसान नहीं है इश्क की अक्सर लोग डगमगा ही जाते है

जो लोग रखते है वफ़ा की उम्मीद अक्सर वो दोखा खा ही जाते है

जो कर लिया इश्क फिर एक दफा तो वो लौट के वापिस कहाँ जा पाते है

शीशा जैसा नाजुक दिल होता है लोग तो पत्थर बरसा ही जाते है

पीते है जाम दर्दो का हर पल वो जो सितमगर को कहाँ भुला पाते है

सच्ची मोहब्बत कौन करता है यहाँ जो करते है वो इतिहास बना जाते है
कलम :- हरमन बाजवा ( मुस्तापुरिया )

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