जिकर अगर हुआ...

जिकर अगर हुआ उनका

तो राज सब खुल जाएंगे

एक मैं ही तो हूँ राजदार उनका

जिसका जिकर कभी हुआ ही नहीं

कलम :- हरमन बाजवा ( मुस्तापुरी )</h6>

Comments