तेरे प्यार ने...

तेरे प्यार ने इस कदर से मेरी ज़िन्दगी सँवार दी
वीरान पड़े इस दिल को जैसे इक नयी बहार दी
फूल खिलते है हर जगह बाग़ वो ही कहलाता है
जिस पर हो माली ने अपनी पूरी रीझ उतर दी
कलम :- हरमन बाजवा ( मुस्तापुरिया )

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