हमें लोगो ने जाना ...

हमें लोगो ने जाना टूटे हुए काँच के जैसा
कहीं जमीन पर बिखर कर पैरो में न चुभ जाये
नासमझ है वो लोग जिन्हें इस बात का एहसास नहीं
के पिसने के बाद भी तो काँच बेशुमार काम आये
कलम :- हरमन बाजवा ( मुस्तापुरिया )

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