इश्क कहते है बर्बाद कर देता है
खिले फूलो की बस्ती को उजाड़ कर देता है
लूट लेता है सब छोड़ता कुछ भी नहीं
बिना आग लगाए ही पल में राख कर देता है
इश्क में बदनाम हुए है लोग बहुत
पर कईयो को सरताज बना देता है
नहीं बिगड़ता कुछ भी जो करते है सौदेबाजीं
सच्ची मोहब्बत करने वालो को तो तबाह कर देता है
यार का अक्स देखते है खुदा की मूरत में
चेहरा वो ही दिखाई देता है उन्हें हर सूरत में
इश्क कर लेना आसान पर पाना मुश्किल होता है
छोड़ के सारे रस्मो रिवाज़ दुनिया को भुलाना होता है
नहीं रहता ख्याल खुद का के लोग दीवाना कहते है
न जाने आशिक प्यार में कैसे कैसे दर्द सहते है
प्यार करने वालो को बेशक जन्नत नसीब होती है
क्यूकि इस दुनिया में तो उनकी पल भर की हस्ती होती है
कई बिछ के राहों में यार की फिर भी कांटे कहलाते है
खुशकिस्मत है वो जो मंजिल को पा जाते है
बावजूद इसके "हरमन" लोग मोहब्बत करते है
चाहते है जिसे सादिक उसकी ख़ुशी में सूली चढ़ते है
नासमझ है वो "बाजवा" जो उनको समझ नहीं पाते
खुद होकर फना जो इश्क की है मशाल जला जाते .
कलम :- हरमन बाजवा ( मुस्तापुरिया )
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