बहुत थक गया हूँ....

बहुत थक गया हूँ अब तो थोडा आराम चाहता हूँ मैं चारो तरफ है शोर शराबा थोडा इतमिनान चाहता हूँ मैं
बांटा है दर्द दुनिया का बहुत थोडा सुकून चाहता हूँ मैं खुद को तन्हा पाता हूँ आजकल अब कोई हमसफ़र चाहता हूँ मैं
मिली है शोहरत भी बहुत मुझे थोडा गुमनान होना चाहता हूँ मैं लोगो ने दिया है प्यार बहुत कोई नया पैगाम चाहता हूँ मैं
अंधेरो के साये में रह हूँ अब तक रोशिनी का कोई निशान चाहता हूँ मैं कांटो से भरे रास्ते थे आखिर तक फूलों का नरम एहसास चाहता हूँ मैं
बिछड़े अपने इस ज़िन्दगी के सफ़र में अब नये लोगो का साथ चाहता हूँ मैं रहती है मसरूफियत हर पल ही बहुत वक़्त खुद के लिए निकलना चाहता हूँ मैं
बांटे कोई आकर दर्द मेरा भी पीडो से छुटकारा चाहता हूँ मैं बदले है ज़माने के रीत और रिवाज़ नये दौर का आग़ाज़ चाहता हूँ मैं
टूट कर बिखरा हूँ टुकडो में फिर से एक होना चाहता हूँ मैं बहुत थक गया हूँ अब तो थोडा आराम चाहता हूँ मैं .
कलम :- हरमन बाजवा ( मुस्तापुरिया )

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