ना कह पाया उनसे दिल की बात..............

ना कह पाया उनसे दिल की बात वो भी ना समझ पाई मेरे जज्बात
आँखों ने भी की थी कुछ बात शायद उस वक़्त ना थे सही हालात
कोशिशे तो की थी हरमन ने लगातार शायद एक तरफ़ा ही था प्यार
क्यू की कई बार हुए थी तकरार जब भी किया था मैंने इज़हार
कोई और ही था उनके दिल मैं मैंने था ये अंदाज़ा लगाया
तभी तो सच्चा प्यार मेरा उनका साथ ना ले पाया
ये समझा लेकिन बाद में बाजवा सिर्फ पाना ही प्यार नहीं होता
रहे सलामत वो हर हाल में जिनका दिल पे है इख्तियार होता.
लेखक :-- हरमन बाजवा ( मुस्तापुरिया )

Comments