कोई उनसे उनकी बेरुखी का .....

कोई उनसे उनकी बेरुखी का सबब पूछे
क्या गुजरती है हम पर यह हमसे पूछे
बैठे है मुह मोड़कर क्यूँ हमसे है रूठे
कैसे मनाये उन्हें ना कोई हल सूझे
लगा नहीं सकते अंदाज़ा वो मेरी चाहत का
रहते है हर वक़्त उनके ही ख्यालो में डूबे .
कलम :- हरमन बजवा ( मुस्तापुरिया )

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