तेरी सादगी पे मर मिटे है हम तो
तेरी सूरत का हर वक़्त दीदार करते है
तुझे पाने की हसरत ना जाने कब से है दिल में
जानशीन तुझ पे हम जान निसार करते है
तेरे हर शौंक का ख्याल भी है हमें
खुद की हर वक़्त कीमत लगाकर रखते है
रहे रोशन तेरा पहलू और राहगुज़र भी
इसीलिए खुद को जलाकर हम रखते है
ना यकीन हो मेरे इतबार का तुझे अगर
आ देख ले तेरा कब से इंतज़ार करते है
ना ब्यान हो सके जो मुद्दतो तक
जानेमन इतना तुझे हम प्यार करते है.
कलम :- हरमन बाजवा ( मुस्तापुरिया ).
Comments
Post a Comment